पश्चिमी सभ्यता में औरतों को "उपभोग की वस्तु" समझना और सुनियोजित रूप से उसका अमानवीयकरण करना (डिह्यूमनाइज़ेशन)
शहीद ख़ामेनेई औरत की मौजूदा स्थिति को किस नज़र से देखते थे और इस संबंध में क्या हल पेश करते थे?