इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर को अंतिम विदाई हक़ीक़त में राह को जारी रखने का वचन है

सब से ज़्यादा ऊंची आवाज़ हमारी अज़ीज़ अवाम के व्यवहार की है जो हमारे अज़ीज़ रहबर की अंतिम विदाई में नज़र आ रही है। जब कहते हैं विदाई, तो मैं इसे नहीं मानता, हक़ीक़त में यह राह को जारी रखने का वचन है।