
शहीद रहबर के सबसे बड़े बेटे आयतुल्लाह सैयद मुस्तफ़ा हुसैनी ख़ामेनेई ने, शहीद रहबर की नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई।
इससे पहले गुरुवार 9 जुलाई 2026 को दोपहर के क़रीब, शहीद रहबर का जनाज़ा नजफ़ से मशहद पहुंचा था।
मशहद में लाखों की तादाद में श्रद्धालु, घंटों से उनके पाकीज़ा शव का इंतेज़ार कर रहे थे। शहीद रहबर की शवयात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा।
कई घंटों की शवयात्रा के बाद, मग़रिब के क़रीब इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर का शव इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के रौज़े में पहुंचा।
याद रहे मंगलवार 7 जुलाई 2026 की रात को इस्लामी इंक़ेलाब के शहीद रहबर आयतुल्लाह सैयद अली हुसैनी ख़ामेनेई और उनके परिवार के शहीदों के जनाज़े लिए हवाई जहाज़, नजफ़ एयरपोर्ट पहुंचा, जहाँ जनाज़े के स्वागत के लिए ईरान के राष्ट्रपति सहित आला अधिकारी और हस्तियां पहले ही पहुंच चुकी थीं।
बुधवार 8 जुलाई 2026 आयतुल्लाह सैयद मोहम्मद तक़ी हकीम ने नजफ़ में अमीरुल मोमेनीन के रौज़े में, शहीद रहबर की नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई थी, जिसके बाद नजफ़ में शवयात्रा शुरू हुयी।
बुधवार 8 जुलाई 2026 की रात को शहीद रहबर का जनाज़ा कर्बला पहुंचा। कर्बला पहुंचने पर, उनके जनाज़े पर फूलों की बारिश की गयी और उनकी शवयात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। घंटों की शवयात्रा के बाद, शहीद रहबर का जनाज़ा इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के रौज़े में दाख़िल हुआ।
शैख़ अब्दुल महदी कर्बलाई ने, इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के रौज़े में, उम्मत के शहीद इमाम की नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई।
गुरुवार की सुबह शहीद रहबर का जनाज़ा हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम के रौज़े में दाख़िल हुआ।
अल्लामा सैयद अहमद साफ़ी ने, हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम के रौज़े में, शहीद रहबर की नमाज़े जनाज़ा पढ़ायी।
ग़ौरतलब है कि बुधवार को शहीद रहबर के परिवार के शहीदों के जनाज़ों को पहले ही कर्बला रवाना कर दिया गया था।