rahbar.ir

इस्लामी इंक़ेलाब के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई का शहीद रहबर की इराक़ में एतिहासिक शवयात्रा पर इराक़ की महान जनता के नाम पैग़ाम

महाशैतान, अपराधी अमरीका को समझ में आ गया है कि क्षेत्र में बिना किसी सिर दर्द के अपनी वर्चस्ववादी मौजूदगी को जारी रखना आसान नहीं है

इस्लामी इंक़ेलाब के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई ने, इराक़ी क़ौम द्वारा शहीद रहबर की शवयात्रा का कारनामा अंजाम दिए जाने पर आधारित बयान जारी किया है, जो इस प्रकार हैः

बिस्मिल्लाह अर्रहमान अर्रहीम

इराक़ की मज़लूम सरज़मीन के वरिष्ठ धर्मगुरुओंधार्मिक ज्ञान केन्द्रों और यूनिवर्सिटियों के सम्मानीय उस्तादों और विद्वानोंमूल्यवान विचारकों और बुद्धिजीवियोंक़बीलों के सरदारोंअज़ीम अवाम और ग़ैरतमंद नौजवानों की सेवा में हार्दिक सलाम पेश करता हूं। 

इराक़ के मोमिन अवाम ने जो पैग़म्बरे इस्लाम के अहलेबैत के पाकीज़ा रौज़ों के पड़ोस में और उसकी मेज़बानी की महान नेमत से मालामाल हैंउज्जवल संस्कृति के स्वामी और नजफ़े अशरफ़ जैसे प्राचीन व प्रकाशमयी धार्मिक केन्द्र के आध्यात्मिक व मार्गदर्शक सहारे से लाभान्वित हैंरेज़िस्टेंस मोर्चे में मुजाहिदों जैसा व्यवहार करने वाले हैंमहान शहीद नेता के स्वागत में ईरानी क़ौम की तरहबड़ा अर्थपूर्ण कारनामा अंजाम दिया जो मुहब्बत और दर्द से भरा था। 

इराक़ उस दिन से मुबारक सरज़मीन हो गया जिस दिन उस पर हमारे मौला अमीरुल मोमेनीन के -अल्लाह का दुरूद व सलाम हो उन पर- क़दम पड़े और जल्द ही वहां के अवाम ने उस हस्ती और उनकी पाकीज़ा औलाद की– उन सब पर अल्लाह का दुरूद व सलाम हो- मोहब्बत और विलायत के तौक़ को बड़े फ़ख़्र से अपने गले में पहन लिया। इस सरज़मीन पर ज़ालिम शासकों और तानाशाहों के वर्चस्व के दौरकभी भी इन अवाम के दिलों से पैग़म्बरे इस्लाम के पाकीज़ा अहलेबैत की मोहब्बत और विलायत के बेमिसाल रत्न को नहीं निकाल सके। इसलिए बासी सरकार के पतन के बादअर्बईन के पैदल मार्च की महाघटना हुई और चूंकि यह ईमान से सुशोभित अवाम के दिल की गहराई से निकली थीदिन ब दिन इसका दायरा फैलता गया और ठीक इसी वजह से जब इन अवाम ने देखा कि अमीरुल मोमेनीन और शहीदों के सरदार इमाम हुसैन की -इन दोनों हस्तियों पर अल्लाह का दुरूद व सलाम हो- मज़लूम व शहीद संतानपाकीज़ा दर्शन स्थलों से ज़ाहिरी तौर पर बरसों दूरी के बाद, इस बार इमाम हुसैनउनकी माँ और भाई के शव की तरहपाकीज़ा रौज़ों के तवाफ़ के लिए आ रही हैतो पूरे वजूद से उसका स्वागत किया। 

दूसरी ओर रेज़िस्टेंस के अलमदार की दसियों लाख की तादाद में लोगों की शिरकत पर आधारित बेमिसाल शवयात्रा नेईरान और इराक़ की दोनों क़ौमों के बीच भाईचारेसौहार्द और एक मत के पैरोकार के संपूर्ण जलवे को पेश किया। इस बात में शक नहीं कि साम्राज्यवादी सरग़नाओं ने डरे हुए दिलों से इराक़ में इस विशाल प्रोग्राम के भव्य मंज़रों की तस्वीरों को देखा और उन्होंने पाया कि किस तरह वह भारी पूंजिनिवेश जिसे उन्होंने इन दोनों क़ौमों के संबंधों को ख़राब करने के लिए किया थाखोखला और बेअसर निकला। ईरान में भी और इराक़ में भी मुजाहिद व शहीद इमाम की शवयात्रा में – अल्लाह उनके दर्जे बुलंद करे- दसियों लाख लोगों की मौजूदगी नेसाम्राज्यवादियों के पहले से बनाए गए समीकरणों को बदलने में रोल निभाने और जागरुकता का प्रदर्शन करने में नया अध्याय जोड़ा। अब महाशैतानअपराधी अमरीका को समझ में आ गया है कि क्षेत्र में बिना किसी सिर दर्द के अपनी वर्चस्ववादी मौजूदगी को जारी रखना आसान नहीं है। 

जल्द ही इराक़ की उदार क़ौम और उस के मोहब्बत करने वाले क़बीले अर्बईन के ज़ायरों का जिनमें ईरान के शहीद आक़ा की तरफ़ से बड़ी तादाद में ज़ियारत करने वाले भी होंगेइस महान हस्ती की शानदार शवयात्रा की यादों के साथ जिसने बरसों पाकीज़ा स्थलों की ज़ियारत करने की कामना की, ‘इमाम हुसैन की मोहब्बत हम सबको इकट्ठा करती है’ के हक़ीक़त से भरे नारे के साथखुले दिल से स्वागत करेंगे और इंशाअल्लाह हमारे सरपरस्त हज़रत इमाम महदी की– अल्लाह उन्हें जल्द से जल्द ज़ाहिर करे- दुआ से इराक़ी क़ौम तरक़्क़ीबर्कत और सुरक्षा से समृद्ध होगीअल्लाह की मेहराबनी और कृपा से।

सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई

17 जुलाई 2026